Friday, November 14, 2008

बेटीक सोहर

सोहर अशोक दत्त

धन–धन भाग हमर घर लछमी जनम लेल हे

बहिना हे, बाँहिकेर पलना बनाएब दुलरी झुलाएब हे
ठुमकि आङन बीच घुमत बुच्ची मुस्काएत हे

बहिना हे, बुच्चीकेर मुस्की सङ गाएब मनवाँ जुड़ाएत हे
हुलसि धीयाके पढ़ाएब इसकुल पठाएब हे

बहिना हे, गार्गी मैत्रेयी सन ज्ञानी धीयाके बनाएब हे
आँजुरमे चान–तरेगन धीयाके समाएत हे

बहिना हे, करमसँ सावा हाथ धरती ई अपने उठाएत हे

नारीएसँ सम्मान

नारीएसँ सम्मान –अशोक दत्त

नारीए कोँखिसँ सभ जन्मैए नारीएसँ सम्मान
होइ किए छै सगरो तैयो नारीएके अपमान

कत्तौ नोचल पटकल जाइए, कत्तौ जाइछ जड़ाओल
दहेज आ रीति–रिवाजक नामे फाँसी जाइछ चढ़ाओल
विभेदकेर अँचियापर रहितो रखैए सभके मान
होइ किए छै सगरो तैयो ............
पुरुष करए जँ टोना–टापर धामी कहि गोहराओल
डाइन कहि नारीके ओत्तै विष्ठा जाइछ पिआओल
विक्खक घोट बाध्य भऽ पीबए, बाँटए सदिखन मुस्कान
होइ किए छै सगरो तैयो.................

गार्गी, सीता, अनसुइया बनि पुरुषक मान रखैए
शोषणकेर शूलसँ ओकरे तन–मन बेधल जाइए
दुःख दर्द धरती सन सहिकऽ, करैछ सभक कल्याण
होइ किए छै सगरो तैयो ...............

हम जे गौरव करैछी

हम जे गौरव करैछी – अशोक दत्त
सोहर साँझ पराती निस दिन अनुगुञ्जित जाहि ठाम
हम मैथिल छी मिथिलाके सीता नैहर अछि गाम
हमर मिथिला महान हमर मैथिली महान

धीया भारती शास्त्रार्थमे कएल पराजित शंकराचार्य
तपोभूमि आ ज्ञानभूमिसँ महिमामण्डित ई भू–भाग
गौतम कणाद मण्डन अयाची जन्मल वाचस्पति महान
अही धराके धीया सीया गार्गी मैत्रेयी के नहि जान
कालीदास आ गोनू हमरे सुगा पढ़ए एतै पुराण
हमर मिथिला महान हमर मैथिली महान

वीर सपूत मैथिलके अछि भैया अनेको अमर गाथा
दिना भद्री सल्हेश लोरीक दुलरादयाल हमरे भ्राता
स्वयं स्वयंभू उगना बानिक आएल छलाह जाहि ठाम
कण–कणमे अछि रचल–बसल ओहि विद्यापतिके तान
गंगा कोशी कमला गण्डक बहए बागमती वलान
हमर मिथिला महान हमर मैथिली महान

मन्दिर मस्जिद एक्के जहिना चान सुरुज सझिया
सामा–चकेवा गोदना झिझिया तहिना मोहर्रमके तजिया
जाति–पातिके भेद जत' नइँ अछि हमरे ओ पहिचान
तिलकोरक तरुवा माछ दही संग अनुपम पान मखान
पुनर्जन्म जं हुऔ कहियो जन्मी फेरो एही ठाम हमर मिथिला महान हमर मैथिली महान

दूटप्पी

पतुरिया सन मुस्की मगरसन नोर नेने, भोरस संझाधैर फुसीय परसैय
गिरगिट त' दुनियामे ब्यर्थे बदनाम अछि, गिरगिटस बेसी मनुक्ख रंग बदलैय .